10 प्रमुख जोड़ों के दर्द, व्यायाम और दर्द के दर्द को स्वभाविक रूप से कम करें
जोड़ों का दर्द और विशेष रूप से जोड़ों का दर्द आम समस्या बन गई है, विशेष रूप से उम्र बढ़ने के साथ या फिर जोड़ों का दर्द के कारण। इसके लिए व्यायाम एक बहुत अच्छा और प्राकृतिक तरीका है जो दर्द को कम करने में मदद करता है। 10 प्रमुख व्यायाम जैसे की सेजलिंग , लेग रेज, फोटोग्राफर सेप्स स्ट्रेंथनिंग और लेग वॉकिंग से जोड़ों को लचीला बनाया जा सकता है और जोड़ों को मजबूत बनाया जा सकता है। यह व्यायाम खून के बहाव को बेहतर बनाता है और सूजन को भी कम करने में सहायक होता है, जिससे दर्द के दर्द से राहत मिलती है।
दूसरा, इन व्यायामों को रोजाना करने से ना सिर्फ दर्द में कमी आती है बल्कि जोड़ों के दर्द भी कम होते हैं। जैसे कि सीधे पैर उठाना या फिर चेयर स्क्वाट्स करना, दांतों के आस-पास के मसालों को ताकत देना और जोड़ों पर दबाव कम करना है। साथ ही, गर्म पानी से सिकाई या मालिश से भी प्राकृतिक रूप से दर्द को कम करने में मदद मिल सकती है। इन सबके लिए नियमितता जरूरी है और अगर दर्द ज्यादा हो तो डॉक्टर से सलाह लें और ठीक रहें।
यहां 10 जोड़ों के दर्द के व्यायाम के बारे में बताया गया है जो स्वाभाविक रूप से दर्द के दर्द को कम करते हैं
यहां 10 जोड़ों के दर्द के व्यायाम के बारे में बताया गया है जो स्वाभाविक रूप से दर्द के दर्द को कम करने में मदद करते हैं। ये व्यायाम न केवल मसालों को मजबूत बनाते हैं, बल्कि स्टॉक और बैलेंस भी बनाते हैं, जिससे दबाव कम होता है। नियमित रूप से इन व्यायामों का अभ्यास करने से दर्द से राहत मिलती है और दैनिक विश्राम करने में आसानी होती है। जोड़ों के दर्द को कम करने के लिए नीचे 10 प्रमुख व्यायाम दिए गए हैं:

1. चित्र रेखांकन (कोमल खींच):
चित्रांकन करना जोडो की होल्डन को थोड़ा कम करता है और रक्त फ़्लो को पुनर्प्राप्त करता है। जब भी आप सुबह उठते हैं या ज्यादा लेट हो जाते हैं, तो थोड़ा हाथ-पैर की खींच से शरीर थोड़ा रेलैक्स महसूस होता है। ये कोई बहुत रोज जोरों वाली नहीं है, लेकिन अगर चला जाए तो बहुत असरदार होती है।
2. एंकल पंप्स (एंकल पंप्स):
एन्कल पंप्स एक आसान सी लक्ष्य है जो आपके खाने और प्लली में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करता है। बस आपको इसमें एड़ियों को ऊपर-नीचे करना होता है, जिसे बैठाया या लेटाया जाता है। बुजुर्ग लोग जिनके लिए या जो लोग चल नहीं पाते, उनके लिए ये काफी चमत्कारी होता है।
3. सिट-टू-स्टैंड (बैठकर खड़े होने का व्यायाम):
सीट-टू-स्टैंड में आपको कुर्सी से मिलना और फिर धीरे-धीरे बैठना होता है। ये आदिवासियों की ताकतें और सामग्रियां सबसे अच्छी हैं। शुरुआत में थोड़ी मुश्किल हो सकती है लेकिन धीरे-धीरे शरीर को आदत हो जाती है।
4. लेग रेज़ (पैर उठाना):
लेग रेज़ में आप पीठ के बल लेटकर एक पैर को धीरे-धीरे ऊपर की ओर इशारा करते हैं और थोड़े देर तक परेशान हो जाते हैं। ये आपके दांतों के मसाले और पेट के आस-पास की ताकतें हैं। अगर डायबिटीज में दर्द होता है तो ये समस्याएं बहुत मदद करती हैं।
5. हिल और टो रेज़ (एड़ी और पैर की अंगुली उठाना):
इस सूची में आपको अपने एडियों और पंजों को ऊपर-नीचे करना होता है। इससे पिंडली की मांसपेशियों में ताकत आती है और पैरों का रक्त प्रवाह भी मजबूत होता है। ये बहुत सिंपल है, पर अगर नियमित किया जाए तो काफी फायदा होता है।
6. क्लैमशेल व्यायाम (क्लैमशेल व्यायाम):
क्लैमशेल आर्क हिप्स और थाई साइड वाले मसल्स को मजबूत बनाता है। इसमें आपको साइड में लेटकर दोनों एमए को हल्का सा मुंह दिखाई देता है, जैसे कोई शंख खोल रहा हो। ये हिप्स के दर्द और लोअर बैक पेन में बहुत ज्यादा मात्रा में होता है।
7. पुल ब्रिज (ग्लूट ब्रिज):
पुल ब्रिज बनाने से कमर और कूल्हों की ताकत बढ़ती है। इसमें आपको पीठ के बल लेटकर अपने कूल्हों को ऊपर उठाना होता है। शुरू में एक-दो बार करें, फिर धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे बढ़ सकती है। ये खास तौर पर स्पाइन दर्द वालों के लिए बहुत बढ़िया है।
8. क्वाड्रिसेप्स सेट (क्वाड्रिसेप्स सेट):
ग्राड्राईसेप सेट गोदाम में आपको अपने दांतों के नीचे गोदाम या तौलिया के साथ दांतों के मसल्स को टाइट करना होता है। ये थाई के आगे वाले मसल्स को सक्रिय करता है और मसालों को स्थिर बनाए रखने में मदद करता है। इसे रोज़ कुछ मिनट करने से दिखता है।
9. मुद्रा (तितली मुद्रा):
मुद्रा मुद्रा एक योगासन है जिसमें दोनों पैरों को एक साथ मिलाकर, पैरों को ऊपर-नीचे किया जाता है। इससे कूल्हों, कमर और जोड़ों में लचीलापन आ जाता है। ये मुद्रा बहुत ही आरामदेह होती है, खासकर लंबे समय तक बैठने के बाद।
10. योगासन (जोड़ों के दर्द के लिए योग):
जोड़ों के दर्द में योगासन बहुत प्रभावशाली दिखता है। जैसे वज्रासन, बालासन और भुजंगासन आदि से शरीर का आकार और जोड़ों का व्यायाम कम होता है। युवाओं और आरामदायक योगों से दिन की शुरुआत करने से शरीर पर प्रभाव पड़ता है और दर्द से राहत मिलती है।
बार-बार पूछे जाने वाले वॉलपेपर
1. क्या ये व्यायाम उम्रदराज़ लोगों के लिए भी सुरक्षित हैं?
हां, ये सभी एक्सरसाइज वर्कआउट और धीरे-धीरे चलने वाले हैं, जिनमें बुजुर्ग लोग भी आराम से कर सकते हैं। हर व्यायाम को 5-10 बार शुरू करें और शरीर की सहनशक्ति के अनुसार धीरे-धीरे व्यायाम करें।
2. इन अलॉटमेंट से कितने दिनों में दांतों के दर्द से राहत मिलती है?
यदि नियमित रूप से 15-20 मिनट प्रतिदिन किया जाए, तो लगभग 2 से 3 वर्षों में दांतों में सुधार दिखता है। लंबे समय तक दर्द हो तो किसी फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह ली जाती है।
3. इन ग्राहकों को स्मारक के बिना भी क्या किया जा सकता है?
बिल्कुल! ये व्यायाम असंगठित रूप से जोड़ों और होठों को स्ट्रैटीली दिया जाता है, जिससे पढ़ाई पर निर्भरता कम हो सकती है। लेकिन अगर दर्द ज़्यादा है, तो डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।
उत्साह
जोड़ों और मधुमेह के दर्द से राहत पाने के लिए आहार उपचार या भारी दवाइयों पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाता है। सही समय पर दिए जाने वाले व्यायाम और नियमित व्यायाम से शरीर के अंदर से स्ट्रेच ब्लॉक होते हैं और जोड़ों में रक्तचाप का संतुलन बिगड़ जाता है और सूजन कम हो जाती है। ऊपर बताए गए 10 व्यायाम जैसे कि चित्र चित्र, एंगल पंप्स, पुल ब्रिज और आसन, न केवल दर्द में राहत देते हैं बल्कि आपके रोज़मर्रा की स्थिति में भी आसानी से योग मिलते हैं। अगर आप रोजाना 15-20 मिनट के लिए व्यायाम में शामिल होते हैं और अपने शरीर के वजन को धीरे-धीरे बढ़ाने वाले अभ्यास अभ्यासों को बढ़ाते हैं, तो प्राकृतिक रूप से आपको कमजोरी और जोड़ों के दर्द से राहत मिल सकती है। याद रखें, स्वायत्तता ही सबसे बड़ी दवा है।
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